मेडिकल दाखिला घोटाला : ओडिशा HC के पूर्व जज समेत 5 को सीबीआई ने किया गिरफ्तार

Published on : 23/09/2017

मेडिकल महाविद्यालय में चल रहे भारी भष्टाचार को लेकर खबर सामने आई है। सीबीआई (Central Bureau of Investigation) ने एमबीबीएस (MBBS) दाखिला घोटाले में ओडिशा उच्च न्यायालय के सेवा निवृत्त न्यायाधीश इशरत मसरूर कुद्दुसी और अन्य 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।

सीबीआई (CBSC) ने कुद्दुसी को ग्रेटर कैलाश से और लखनऊ में एक मेडिकल कॉलेज चलाने वाले प्रसाद एजुकेशनल ट्रस्ट के बी पी यादव, पलाश यादव, एक बिचौलिया विश्वनाथ अग्रवाल और हवाला कारोबारी रामदेव को गिरफ्तार किया।

बुधवार को सीबीआई (CBSC) की छापेमारी के बाद लखनऊ, भुवनेश्वर और दिल्ली से आरोपियों को हिरासत में लिया गया था। एजेंसी को 1.91 करोड़ रु. भी बरामद हुए। 

मीडिया की खबर के अनुसार, सीबीआई (CBSC) का आरोप है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) द्वारा प्रतिबंधित होने के बावजूद उत्तर प्रदेश स्थित शैक्षिक ट्रस्ट ने पैसे वाले अयोग्य छात्रों को निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने में मदद की। इन्होंने ने अपने पद का निजी अस्पताल के अधिकारियों के साथ मिलकर दुरुपयोग किया है। जब यह मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा तो रफा दफा कर दिया गया। जिससे योग्य छात्रों को दाखिला नहीं मिल पाया। 

आपराधिक साजिश के लिए कुद्दुसीपर भ्रष्टाचार निरोधकअधिनियम के तहत धारा 8 और अन्य 4 आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता के तहत धारा 120 लगाई गई है। खबर के अनुसार, कुददुसी ने निजी अस्पतालों में केवल कानूनी सलाह दी, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले को निपाटने के लिए मदद करने का आश्वासन भी दिया था।

सीबीआई (CBI) ने यह भी बताया कि निजी अस्पतालों को लेकर आरोपियों द्वारा दायर की गई याचिका कुददुसी के कहने पर सर्वोच्च अदालत से वापस ले ली गई थी।

वहीं सर्वोच्च न्यायालय (SC) इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एसएन शुक्ला और वीरेंद्र कुमार की भूमिका की भी जांच कर रही है। निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिला के लिए इन्होंने इजाजद दी थी, जबकि इसके विपरीत सर्वोच्च अदालत ने किसी भी उच्च न्यायालय को ऐसा नहीं करने का आदेश दिया था।

भारतीय मेडिकल काउंसिल ने जुलाई महीने में लखनऊ स्थित कॉलेज के साथ 50 अन्य महा विद्यालय पर रोक लगा दी थी ताकि मेडिकल छात्रों को अपर्याप्त सुविधाओं के कारण आने वाले चौथे शैक्षणिक वर्ष के लिए दिक्कत ना हो।

सर्वोच्च न्यायालय नें 1 अगस्त को केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा था। 10 अगस्त को सरकार ने इस महाविद्यालय को सुनवाई में अपना मुद्दा रखने का अवसर दिया और इस महाविद्यालय को मेडिकल छात्रों को दो साल तक के लिए दाखिला ना देने का आदेश पारित किया है।

नीट (NEET) परीक्षा को लेकर विवाद जारी है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2016 में आदेश दिया था कि मेडिकल महाविद्यालय में दाखिला सामान्य प्रवेश परीक्षा के द्वारा होंगे, वो भी केवल हिंदी और अंग्रेजी भाषा में। इसके तहत पहला पेपर 1 मई और दूसरा 1 जुलाई हो चुके हैं।

सर्वोच्च न्यायालय (SC) के इस फैसले पर हिंदी और अंग्रेजी के अलावा दूसरी भाषाओं में परीक्षा देने वाले राज्यों केछात्रों को ने ऐतराज जताया था। उनका कहना है दूसरी भाषा से नुकसान होगा।

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